दो साल गहरी रिसर्च करके कार लेने पहुंचा बुजुर्ग, सवाल सुनकर शोरूम छोड़कर भागे सेल्समैन


दो साल गहरी रिसर्च करके कार लेने पहुंचा बुजुर्ग, सवाल सुनकर शोरूम छोड़कर भागे सेल्समैन

इंदौर के सुंदर विहार अपार्टमेंट में रहने वाले एक बुजुर्ग हर्षल खैरनार दो साल पहले एक नई कार खरीदने वाले था। जैसे ही ये बात उसके एक fb के परम मित्र राजेश भट्ट को पता चली तो उसने हर्षल जी को सलाह दिया कि- “कार लेना कोई बच्चों का खेल नहीं है, पहले तू अच्छे से रिसर्च कर ले फिर खरीदने जाना वरना तुझे बुद्धू बनाके खटारा पकड़ा देंगे शोरूम वाले। उनका क्या है? उन्हें तो कार बेचनी है बस!”

बस, हर्षल जी अपने दोस्त की बातों में आ गए और उन्होंने उस दिन से ही कार के बारे में रिसर्च करना शुरू कर दिया। हर रोज़ ऑफिस से आने के बाद लैपटॉप खोलकर बैठ जाते और कारों के मॉडल और फीचर्स देखते रहते। हर्षल जी जब भी किसी कार वाले से मिलते तो उससे उसके कार के बारे में पूछने लगते- ‘कितने की पड़ी? माईलेज कितना देती है? वगैरह-वगैरह?’

इसी तरह दो साल तक रिसर्च करने के बाद हर्षल जी Car के मामले में एक्सपर्ट हो गये। अब उन्होंने कार खरीदने की ठान ली और कल पहुँच गया शोरूम। शोरूम पहुँचते ही सेल्समेन ने उसका स्वागत किया और कहा- आईए सर! मैं आपको कार दिखाता हूँ।” तो हर्षल जी थोड़ा बनते हुए कहा-‘रहने दो! मैं देख लूँगा।”-कहते हुए हर्षल जी पूरे शोरूम का चक्कर लगाने लगे।

सभी कारों को घूर-घूरकर देखने के बाद वो सेल्समेन के पास आकर बोले- “ये पीली वाली Car का मैक्स टार्क कितना है? उस नीली वाली कार में बम्पर 2.5 CM छोटा क्यों है? इस वाले car की गियर बॉक्स कहाँ बनी है इंडिया में की चीन में? इसका बैटरी केबल मजबूत है कि नहीं?’

सेल्समेन सोच रहा था कि ये तो सिर्फ माईलेज के बारे में ही पूछेगा लेकिन इतने सारे सवाल सुनकर सेल्समेन की आँखें फट गयीं और मुंह खुला का खुला रह गया। उसे कुछ नहीं सुझा। 

“अभी सेठजी को बुलाके लाता हूँ! वही बताएंगे।”-ऐसा कहते हुए वह अपने मालिक को बुलाने चला गया। 

थोड़ी देर बाद शोरूम का मालिक आया और Harshal Khairnar जी से बोला-“अच्छा तो आप हैं! बताइए आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?

इतना सुनते ही हर्षल जी ने फिर से तीन-चार सवाल एक साथ दाग दिए- ” इस Car का स्लिप रिंग अच्छा है कि नहीं? उस ब्लैक Car का स्पार्क प्लग खोलके दिखाओ ना मुझे चेक करना है? उस लाल वाली कार में रोटर और स्टेटर अच्छा वाला लगा है कि नहीं?”

हर्षल जी लगातार सवाल ठोंक रहे थे और शोरूम में मौजूद सारे लोग सिर्फ उसका चेहरा देख रहे थे। जवाब कोई नहीं दे रहा था। सवालों से तंग आकर वहां से भागने का महान कार्य की शुरुवात शोरूम के मालिक ने शुरू किया जिसे सेल्समेन ने आगे बढाया। थोड़ी देर बाद जब वहां कोई नहीं बचा तो हर्षल जी ने कहा-अरे कहाँ चल दिए! रुकिए तो! खैर कल फिर किसी दुसरे शोरूम में ट्राई करूँगा।”-कहते हुए वो घर वापस आ गया।

इस घटना के बाद से कारशोरूम वालों में डर का माहौल है और उनलोगों ने 14 तारीख को राजेश भट्ट और हर्षल जी के घर के बाहर धरना देने की योजना बना रहे हैं ....ये वही राजेश जी है जिन्होंने इतना भयंकर ज्ञान हर्षल जी को दिया। 

वहीं उन सेल्समेन यूनियन ने पुलिस प्रसाशन को लिखित में ये ज्ञापन दिया है हर्षल जी आज के बाद किसी सेल्समेन से ना ही कुछ बोलेंगे और ना ही कभी कुछ पूछेंगे।

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